वंदे मातरम् विवाद: सोनिया गांधी के इशारे पर सियासी घमासान

15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् के पूर्ण गायन को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। कार्यक्रम का एक वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने गीत को बीच में रोकने का संकेत दिया। हालांकि, कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज किया है।

क्या हुआ कांग्रेस मुख्यालय में?

स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं, गायकों और सेवा दल के सदस्यों द्वारा वंदे मातरम् का गायन किया जा रहा था। इसी दौरान सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच कुछ बातचीत और इशारे कैमरे में कैद हुए। इसी वीडियो को लेकर बीजेपी ने सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सोनिया गांधी पूर्ण संस्करण के गायन से असहमत थीं।

कांग्रेस ने आरोपों पर क्या कहा?

कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को गलत बताया। पार्टी की ओर से कहा गया कि सोनिया गांधी का उद्देश्य वंदे मातरम् को रोकना नहीं था। कांग्रेस के अनुसार, वह लंबे समय तक खड़े रहे मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था करने को लेकर इशारा कर रही थीं।

कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने भी कहा कि पार्टी के नेताओं द्वारा पहले से तय परंपरा के अनुसार कार्यक्रमों में वंदे मातरम् की शुरुआती पंक्तियों का गायन किया जाता रहा है।

बीजेपी ने सोनिया गांधी से मांगी माफी

विवाद बढ़ने के बाद बीजेपी नेताओं ने सोनिया गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा। पश्चिम बंगाल बीजेपी विधायक और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कथित घटना पर गहरा दुख जताया और माफी की मांग की।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। दूसरी ओर, कांग्रेस ने बीजेपी पर राजनीतिक मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।

क्यों महत्वपूर्ण है वंदे मातरम्?

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा रहा है। इसे भारत के राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त है और स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसरों पर इसका विशेष महत्व माना जाता है।

निष्कर्ष

कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के पूर्ण गायन को लेकर सामने आए वीडियो ने एक नया राजनीतिक विवाद पैदा कर दिया है। बीजेपी इसे गीत के अपमान से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि सोनिया गांधी का इशारा गीत रोकने के लिए नहीं बल्कि मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था को लेकर था। इसलिए सोनिया गांधी के “वंदे मातरम् से नाराज होने” को फिलहाल आरोप के रूप में ही प्रस्तुत करना तथ्यात्मक रूप से सही होगा।

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