
संसद मानसून सत्र 2026 Day Highlights
23 जुलाई 2026 को संसद के मानसून सत्र का चौथा दिन भी राजनीतिक टकराव और लगातार हंगामे के बीच बीता। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। बार-बार व्यवधान के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी और दोनों सदनों को कई बार स्थगित करना पड़ा।
चौथे दिन संसद में कौन-कौन से मुद्दे उठे?
- परीक्षा पेपर लीक का मुद्दा सबसे बड़ा विषय बना
संसद के चौथे दिन भी परीक्षा पेपर लीक का मामला सबसे प्रमुख मुद्दा रहा। विपक्ष ने इस विषय पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। विपक्ष का कहना था कि लाखों छात्रों को प्रभावित करने वाले इस मुद्दे पर विस्तृत बहस होनी चाहिए।
- छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर चर्चा की मांग
देश के विभिन्न हिस्सों में चल रहे छात्र आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा। कई सांसदों ने प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

- सरकार ने चर्चा की इच्छा जताई
सरकार ने कहा कि वह पेपर लीक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन चर्चा संसद के नियमों और प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए। सरकार ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही चलने देने की भी अपील की।
- बार-बार स्थगित हुई कार्यवाही
लगातार नारेबाजी और विरोध के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। प्रश्नकाल और अन्य निर्धारित विधायी कार्य भी प्रभावित हुए, जिससे चौथे दिन भी संसद का अधिकांश समय हंगामे की भेंट चढ़ गया।
- गतिरोध खत्म करने की कोशिशें
दिनभर सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत के प्रयास जारी रहे ताकि संसद की सामान्य कार्यवाही शुरू हो सके। हालांकि दिन समाप्त होने तक किसी ठोस सहमति की घोषणा नहीं हो सकी।

आगे क्या?
अब सभी की निगाहें मानसून सत्र के अगले कार्यदिवस पर हैं। यदि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है, तो पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था, लंबित विधेयकों और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।
निष्कर्ष
23 जुलाई 2026 को मानसून सत्र का चौथा दिन भी राजनीतिक गतिरोध के कारण प्रभावित रहा। पेपर लीक, छात्रों के आंदोलन और संसद में चर्चा की मांग दिनभर के प्रमुख विषय रहे। लगातार हंगामे के चलते संसद का नियमित कामकाज प्रभावित हुआ, जबकि सरकार और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने रुख पर जोर बनाए रखा।

