
परिचय
अगस्त 2026 की शुरुआत में केरल एक बार फिर भीषण बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की चपेट में आ गया। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कई जिलों में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा, जिससे हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा। कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया और सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है।
केरल में बाढ़ की स्थिति क्यों बनी?
केरल में जुलाई के अंतिम सप्ताह और अगस्त के पहले सप्ताह में लगातार भारी वर्षा हुई। पश्चिमी घाट के पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश के कारण नदियां उफान पर आ गईं और कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आईं। कुछ जिलों में 300 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज की गई, जिससे अचानक बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।
सबसे अधिक प्रभावित जिले
बाढ़ और भूस्खलन का सबसे अधिक असर राज्य के कई मध्य एवं उत्तरी जिलों में देखने को मिला। इनमें मुख्य रूप से:
- कन्नूर
- वायनाड
- इडुक्की
- कोझिकोड
- मलप्पुरम
- एर्नाकुलम
- कोट्टायम
इन क्षेत्रों में कई गांव जलमग्न हो गए तथा सड़क और बिजली जैसी मूलभूत सेवाएं प्रभावित हुईं।

राहत एवं बचाव अभियान
राज्य सरकार, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), पुलिस, दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
सरकारी राहत शिविरों में हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, पेयजल, दवाइयों और आवश्यक राहत सामग्री की व्यवस्था की है।
जान-माल का नुकसान
ताजा आधिकारिक जानकारी के अनुसार भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई लोगों की मृत्यु हुई है तथा कुछ लोग लापता बताए गए हैं। हजारों परिवारों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। अनेक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और कृषि भूमि को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

IMD की चेतावनी
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने राज्य के कई जिलों के लिए भारी बारिश, तेज हवाओं और समुद्र में ऊंची लहरों को लेकर अलर्ट जारी किया है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है तथा लोगों से नदी किनारे और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की गई है।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक मौसम और आपदा संबंधी सूचनाओं पर भरोसा करें। जरूरत पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाएं तथा राहत एवं बचाव दल के निर्देशों का पालन करें।
निष्कर्ष
केरल में 2026 की बाढ़ ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि अत्यधिक वर्षा और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए मजबूत आपदा प्रबंधन, समय पर चेतावनी प्रणाली और नागरिकों की सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी हैं और प्रशासन प्रभावित लोगों तक हर संभव सहायता पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।

