
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच 18 जुलाई 2026 को घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के कारण अस्पताल ले जाया गया। इसके कुछ समय बाद प्रदर्शन स्थल पर Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत डिपके पर एक महिला ने स्याही फेंक दी। इसके बाद अभिजीत डिपके ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग भी उठाई, जिससे आंदोलन को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई।
क्या हुआ जंतर-मंतर पर?
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर भूख हड़ताल पर थे। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों की मौजूदगी में उन्हें अस्पताल ले जाया गया। प्रशासन का कहना है कि यह कदम उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया, जबकि आंदोलन से जुड़े लोगों ने इसे आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश बताया।
अभिजीत डिपके पर स्याही फेंकने की घटना
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद जंतर-मंतर पर माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। इसी दौरान जब अभिजीत डिपके समर्थकों को संबोधित कर रहे थे, तभी एक महिला ने उन पर स्याही फेंक दी। घटना के बाद कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया। घटना के पीछे महिला की मंशा को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

पीएम मोदी के इस्तीफे की मांग
स्याही फेंके जाने की घटना के बाद अभिजीत डिपके ने कहा कि अब आंदोलन केवल शिक्षा से जुड़े मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया कि सरकार छात्रों और प्रदर्शनकारियों की चिंताओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। हालांकि, यह उनका राजनीतिक बयान है और इस पर सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।अभिजीत पर स्याही फेंकी, पीएम मोदी के इस्तीफे की मांग

प्रशासन का पक्ष
प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना उसकी जिम्मेदारी है। इसी कारण सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया गया। वहीं, आंदोलनकारी इसे अपनी आवाज दबाने की कार्रवाई बता रहे हैं।
निष्कर्ष
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने, अभिजीत डिपके पर स्याही फेंके जाने और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग ने जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को नया मोड़ दे दिया है। आने वाले दिनों में सरकार, प्रशासन और आंदोलनकारियों के अगले कदम इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगे। फिलहाल, मामले पर सभी की नजर बनी हुई है।

