
उत्तर प्रदेश में हाल ही में शुरू हुए गंगा एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के भारी बारिश के बाद धंसने की खबर सामने आई है। उन्नाव जिले में एक्सप्रेसवे के किलोमीटर 421-422 के बीच, सराय कटियान नहर पुल के पास सड़क के किनारे मिट्टी के कटाव के बाद करीब 10 मीटर गहरा गड्ढा बन गया। घटना के बाद संबंधित अधिकारियों और मरम्मत टीमों ने मौके पर पहुंचकर जांच और सुधार का काम शुरू किया।
कहां धंसा गंगा एक्सप्रेसवे?
रिपोर्टों के मुताबिक, नुकसान उन्नाव के दही चौकी क्षेत्र में बशीरतगंज के पास सराय कटियान नहर पुल के आसपास हुआ। भारी बारिश के कारण सड़क के किनारे की मिट्टी बहने से एक्सप्रेसवे के हिस्से में धंसाव हुआ। मौके पर ड्रेनेज चैनलों में भी नुकसान पाया गया है, जिसके बाद उनकी मरम्मत शुरू की गई। हालांकि, अधिकारियों ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि खराब ड्रेनेज व्यवस्था ही धंसाव का मुख्य कारण थी या नहीं।
₹36,000 करोड़ से ज्यादा की लागत वाला प्रोजेक्ट
गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाला 594 किलोमीटर लंबा, छह लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है। सरकारी प्रसारक आकाशवाणी के अनुसार, इसके निर्माण पर ₹36,000 करोड़ से अधिक की लागत आई है। इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 29 अप्रैल 2026 को किया गया था।
इस परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच तेज सड़क संपर्क विकसित करना और मेरठ से प्रयागराज की यात्रा का समय काफी कम करना है।
अमरोहा में भी सामने आई समस्या
गंगा एक्सप्रेसवे पर बारिश से जुड़ी समस्या केवल उन्नाव तक सीमित नहीं रही। अमरोहा जिले में फैयाजनगर और सहदरा मिलक गांवों के बीच भी भारी बारिश के बाद सड़क के एक हिस्से में धंसाव और गड्ढे जैसी स्थिति सामने आई।
इसके अलावा, उन्नाव में इससे पहले जुलाई में सोनिक टोल प्लाजा से जुड़ने वाली करीब सात मीटर की एप्रोच रोड भी बारिश और मिट्टी के कटाव से प्रभावित हुई थी।
अब क्या होगा?
घटना के बाद प्रभावित हिस्से में मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों की जांच का मुख्य फोकस सड़क के नीचे की मिट्टी, जल निकासी व्यवस्था और बारिश के कारण हुए कटाव पर है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि धंसाव केवल अत्यधिक बारिश और मिट्टी के कटाव का परिणाम था या इसमें निर्माण और ड्रेनेज से जुड़ी कोई कमी भी जिम्मेदार थी।
निष्कर्ष
₹36,000 करोड़ से अधिक की लागत और 594 किलोमीटर लंबाई वाला गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की बड़ी सड़क परियोजनाओं में शामिल है। इसके शुरू होने के कुछ ही महीनों बाद बारिश के कारण अलग-अलग हिस्सों में सामने आई समस्याओं ने निर्माण गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं। फिलहाल प्रभावित हिस्सों की मरम्मत और तकनीकी जांच जारी है, इसलिए किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

