देहरादून नंदा की चौकी रोड धंसने की घटना: 16 करोड़ का पुल 17 दिन में सवालों के घेरे में

देहरादून की नंदा की चौकी में नई सड़क धंसने से उठे निर्माण गुणवत्ता पर सवाल

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र स्थित नंदा की चौकी (टौंस नदी) पुल से जुड़ी एप्रोच रोड भारी बारिश के बाद धंस गई। यह घटना इसलिए चर्चा में है क्योंकि पुल को यातायात के लिए खोले जाने के महज 17 दिन बाद ही सड़क का एक हिस्सा धंस गया। इसके बाद यातायात प्रभावित हुआ और प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर मार्ग को बंद कर दिया।

कब बना था यह पुल?

यह नया पुल वर्ष 2025 में आई बाढ़ और पुराने पुल को हुए नुकसान के बाद तैयार किया गया। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसे लगभग 12–13 जुलाई 2026 को आम जनता के लिए यातायात हेतु खोल दिया गया था। लेकिन पहली बड़ी बारिश के बाद ही पुल से जुड़ी एप्रोच रोड धंस गई।

पुल की लागत कितनी थी?

उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस पुल के निर्माण पर लगभग ₹16 करोड़ खर्च किए गए थे।

किसने बनवाया?

यह पुल उत्तराखंड सरकार के अधीन संबंधित लोक निर्माण/राजमार्ग परियोजना के तहत तैयार किया गया। हालांकि, निर्माण करने वाली एजेंसी या ठेकेदार (Contractor) का नाम अभी तक आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए किसी कंपनी या व्यक्ति का नाम बिना सरकारी पुष्टि के जोड़ना उचित नहीं होगा।

सड़क क्यों धंसी?

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार लगातार हुई भारी बारिश से एप्रोच रोड के नीचे की मिट्टी बह गई, जिससे सड़क का हिस्सा धंस गया। अधिकारियों का कहना है कि मुख्य पुल की संरचना सुरक्षित है, जबकि नुकसान केवल एप्रोच रोड को हुआ है। तकनीकी जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।

जांच के आदेश

घटना के बाद संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और क्षति का आकलन शुरू किया। साथ ही निर्माण गुणवत्ता और डिजाइन की जांच के निर्देश दिए गए हैं। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जाएगी।

स्थानीय लोगों की चिंता

इस मार्ग से देहरादून और पांवटा साहिब के बीच बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। सड़क धंसने के कारण यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने निर्माण गुणवत्ता और मानसून से पहले पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

निष्कर्ष

नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड का कुछ ही दिनों में धंस जाना उत्तराखंड की आधारभूत संरचना की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि पुल सुरक्षित है, लेकिन यह घटना निर्माण मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण और मानसून से पहले की तैयारियों की गहन समीक्षा की आवश्यकता को दर्शाती है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना का वास्तविक कारण क्या था और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

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